Monday, October 18, 2010



इंद्र जिमि जंभ पर… बाडव सुअंभ पर… रावण सदंभ पर… रघुकुलराज है !
पौन बारिबाह पर… संभु रतिनाह पर… ज्यों सहसबाह पर… राम द्विजराज है !
उदरात माउली… रयतेस साउली… गडकोट राउळी… शिवशंकर हा
मुक्तीची मंत्रणा… युक्तीची यंत्रणा… खल दुष्टदुर्जना… प्रलयंकर हा
संतास रक्षितो… शत्रू निखंदतो… भावंडभावना… संस्थापितो
ऐसा युगेयुगे… स्मरणीय सर्वदा… माता-पिता-सखा… शिवभूप तो
दावा दृमदंड पर… चीता मृगझुंड पर… भूषन वितुंड पर… जैसे मृगराज है !
तेज तम‍ अंस पर… कान्ह जिमि कंस पर… त्यों मलिच्छ बंस पर… सेर सिवराज है !
जय भवानी, जय शिवाजी !